असम, गुवाहाटी : असम के गृह एवं राजनीतिक विभाग के मंत्री डॉ. हिमंत विश्व शर्मा ने विधानसभा में बताया कि वर्तमान में असम की मतदाता सूची में 91,385 लोगों के नाम के आगे डी यानी संदिग्ध नागरिक का निशान लगाया गया है। इस संबंध में मंत्री ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के निर्देशों के तहत 4 फरवरी 1997 को जारी एक पत्र के आधार पर असम में मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया गया था। कांग्रेस विधायक नूरुल हुदा के एक लिखित सवाल के जवाब में उन्होंने बताया कि आयोग ने बाद में जुलाई 1997 में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि यदि किसी व्यक्ति की भारतीय नागरिकता पर चुनावी पंजीकरण अधिकारी को उचित जांच के बाद भी कोई संदेह होता है, तो उसका दावा तुरंत खारिज नहीं किया जाएगा, बल्कि मामले को निर्धारित कानून के तहत विदेशी न्यायाधिकरण के पास भेजा जाएगा। इसके बाद नवंबर 1997 में निर्वाचन आयोग ने आदेश दिया कि जिन लोगों के मामले न्यायाधिकरण भेजे गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची में अस्थायी रूप से शामिल किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी संदिग्ध स्थिति को दर्शाने के लिए नाम के आगे डी शब्द लिखना अनिवार्य होगा। वर्ष 1997 और 2004 के पुनरीक्षणों के साथ-साथ गौहाटी उच्च न्यायालय ने भी वर्ष 2009 के मामेजा खातून बनाम भारत सरकार व अन्य मामले में व्यवस्था दी थी कि जिन लोगों की नागरिकता संदिग्ध है और मामले न्यायाधिकरणों में लंबित हैं, उन्हें डी वोटर माना जाएगा। न्यायालयी प्रक्रियाओं और नागरिकता के फैसलों की वर्तमान स्थिति को स्पष्ट करते हुए मंत्री ने बताया कि असम के 56,728 डी मतदाताओं को विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित किया जा चुका है। इसके बाद जिन लोगों ने उच्च न्यायालय का रुख किया, उनमें से भी उच्च न्यायालय ने 831 लोगों को विदेशी माना है। इसके विपरीत एक बड़ी राहत के तहत 65,171 डी मतदाताओं को विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा 42 लोगों को उच्च न्यायालय द्वारा और 3 लोगों को देश की सर्वोच्च अदालत यानी उच्चतम न्यायालय द्वारा भारतीय नागरिक घोषित किया गया है।
मुख्यमंत्री ने की मात्स्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक
मणिपुर, इम्फाल : मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने सचिवालय में मात्स्यिकी विभाग की एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता...
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