असम, तिनसुकिया : असम के युक्तिवादी चिंताधारक, राष्ट्रीय विचारक,राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने तिनसुकिया जिले के कुछ हिस्सों में विवाह योग्य युवकों की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। उनका मानना था कि ड्रग्स के सेवन के चलते जिले के कुछ हिस्सों में विवाह योग्य युवाओं की संख्या कम हो रही है। इसका कारण नशे की लत है ओर ये यौन जीवन पर पड़ रहा नकारात्मक प्रभाव है। तिनसुकिया प्रेस क्लब में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन के दौरान उन्होंने बताया कि गत 16 फरवरी से तिनसुकिया जिला सत्र महासभा और ह्यूमेनिटी फाउंडेशन द्वारा सामाजिक संगठनों, युवाओं एवं
छात्र संगठनों के सहयोग से नशे के खिलाफ महिला सशक्तिकरण और युवाओं की आत्मनिर्भरता पर कार्यशालाएं और प्रेरक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन सभी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय स्तर के मानवाधिकार और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. दिव्यज्योति सैकिया ने प्रेरणादायक व्यक्तव्य रखे। पत्रकार सम्मेलन में डॉ. सैकिया ने कहा कि नशे की लत के कारण तिनसुकिया जिले में एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की संख्या में काफी वृद्धि हुआ है। उन्होंने कहा कि हमें नशे के खिलाफ लड़ने के लिए युवाओं को रचनात्मक और जिम्मेदार कार्यों में लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जो युवा खुद को नशे से मुक्त करने में कामयाब हो गए हैं, उन्हें सामाजिक रूप से अपनाया जाना चाहिए ताकि वे दोबारा उस रास्ते पर न जाएं। डॉ. सैकिया ने कहा कि पाठ्यपुस्तकों में अंधविश्वास, बाल विवाह और नशे के खिलाफ सख्त शैक्षिक लेख शामिल किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं की लत से निपटने के लिए पर्याप्त मनोचिकित्सकों की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि पुनर्वास केंद्र या नशा मुक्ति केंद्र व्यावसायिक केंद्र न बनें। पत्रकार सम्मेलन में तिनसुकिया जिला सत्र महासभा के सचिव दीपक पाटगिरी और ह्यूमेनिटी फाउंडेशन नाम के एक NGO कि कार्यकर्ता महेंद्र बोरा भी उपस्थित थे।
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