नई दिल्ली : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सशस्त्र बलों के वीर और रणनीतिक रूप से कुशल सैन्य अधिकारियों को उनकी अनुकरणीय सेवाओं के लिए देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मानों से नवाजा है। इस गौरवशाली फेहरिस्त में भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और भारतीय वायु सेना के एयर मार्शल अवधेश भारती के नाम प्रमुखता से शामिल हैं। इन दोनों शीर्ष अधिकारियों को देश की सुरक्षा को अभेद्य बनाने और अत्यंत जटिल सैन्य अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए क्रमशः सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल और परम विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया है।लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को देश का प्रतिष्ठित सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल दिया जाना उनकी असाधारण रणनीतिक सूझबूझ और देश की सीमाओं की रक्षा में निभाई गई उत्कृष्ट भूमिका को प्रमाणित करता है। लेफ्टिनेंट जनरल घई भारतीय सेना में कई महत्वपूर्ण और संवेदनशील कमान संभाल चुके हैं, जिसमें कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व करने वाली रणनीतिक चिनार कोर (15 कोर) की कमान भी शामिल है। उनके कार्यकाल के दौरान न केवल सीमा पार से होने वाली घुसपैठ पर प्रभावी ढंग से लगाम कसी गई, बल्कि आंतरिक सुरक्षा की स्थिति में भी व्यापक सुधार देखने को मिला। आतंकवाद के खिलाफ उनके द्वारा तैयार की गई आक्रामक और सटीक रणनीतियों के कारण ही उन्हें इस सर्वोच्च युद्धकालीन सेवा पदक से सम्मानित किया गया है, जो किसी सैन्य अधिकारी को युद्ध या गंभीर संघर्ष जैसी परिस्थितियों में सर्वोच्च स्तर की विशिष्ट सेवाओं के लिए दिया जाता है।दूसरी ओर रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि के रूप में एयर मार्शल अवधेश भारती को प्रतिष्ठित परम विशिष्ट सेवा मेडल से अलंकृत किया गया है। वायु सेना के इस शीर्ष अधिकारी को यह सम्मान मुख्य रूप से नौसेना प्रमुख के विशेष और बेहद संवेदनशील अभियान ऑपरेशन सिंदूर में उनकी केंद्रीय व महत्वपूर्ण भूमिका के लिए मिला है। हालांकि सुरक्षा और रणनीतिक कारणों से ऑपरेशन सिंदूर की कई सूक्ष्म कड़ियां बेहद गोपनीय रखी जाती हैं, लेकिन इस जटिल अभियान में वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतरीन तालमेल स्थापित करने और हवाई सहायता व रणनीतिक योजना को सटीकता से लागू करने का श्रेय एयर मार्शल भारती को जाता है। संकट की स्थिति में उनके त्वरित निर्णयों और उत्कृष्ट नेतृत्व क्षमता ने इस पूरे ऑपरेशन की सफलता तय की, जिसने देश के हितों और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत किया।सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इन दोनों शीर्ष अधिकारियों को मिले ये सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत वीरता और समर्पण का प्रतीक हैं, बल्कि यह भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना के बीच बढ़ते ‘थियेटराइजेशन’ यानी संयुक्त मारक क्षमता और आपसी तालमेल की सफलता को भी दर्शाते हैं। देश के सर्वोच्च पद से मिले इन पदकों ने पूरी सेना के मनोबल को बढ़ाया है और यह स्पष्ट संदेश दिया है कि सीमाओं की रक्षा और राष्ट्रीय हितों के लिए किए जाने वाले हर उत्कृष्ट प्रयास को राष्ट्र हमेशा सर्वोच्च सम्मान देता है।
आईएसएम 2.0 के लिए 1.25 लाख करोड़ के बजट को मंजूरी
नई दिल्ली : वित्त मंत्रालय की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) 2.0 के लिए 1.25 लाख...
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