असम, गुवाहाटी : असम में अब जनगणना की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है, जिसके लिए राज्य सरकार ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। राज्य में जनगणना का कार्य दो चरणों में संपन्न किया जाएगा, जिसकी आधिकारिक शुरुआत आगामी 2 अगस्त से होगी। राज्य जनगणना निदेशालय ने इस बड़े अभियान के लिए कमर कस ली है और इसके लिए कुल 85 हजार गणना अधिकारियों को तैनात किया गया है। जनगणना का यह कार्य 2 अगस्त से शुरू होकर 15 सितंबर तक चलेगा। प्रक्रिया के अनुसार 2 अगस्त को एक मोबाइल पोर्टल लॉन्च किया जाएगा, जिसके माध्यम से नागरिक स्वयं लॉग-इन करके अपने परिवार के सदस्यों, घर, शिक्षा और आजीविका जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां पोर्टल पर दर्ज कर सकेंगे। इस डिजिटल प्रक्रिया के 15 दिनों के बाद यानी 17 अगस्त से गणना अधिकारी घर-घर जाकर नागरिकों द्वारा दी गई इन जानकारियों का सत्यापन करेंगे। इस कार्य को 15 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। अधिकारियों को प्रशिक्षण देने का कार्य 28 मई से शुरू हो जाएगा। पहले चरण में विभिन्न जिलों में दो और तीन दिवसीय प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिसके बाद मास्टर ट्रेनर्स को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि असम में विधानसभा चुनाव के चलते देश के अन्य हिस्सों की तुलना में यहां यह प्रक्रिया कुछ देर से शुरू हो रही है। इस बार जनगणना में कुल 33 तरह के प्रश्न शामिल किए गए हैं, जिनका उत्तर देना अनिवार्य होगा। साथ ही इस बार सभी आवासीय परिसरों की जियो-टैगिंग भी की जाएगी और प्रत्येक घर को एक विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान की जाएगी। जनगणना का दूसरा चरण आगामी फरवरी माह से शुरू होगा, जिसमें जातिगत गणना और सामाजिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस चरण के लिए वर्तमान में मोडेलिटी तैयार की जा रही है, जिसमें आयु, लिंग, व्यवसाय, साक्षरता और जातिगत विवरण जैसे व्यक्तिगत डेटा एकत्र किए जाएंगे। राज्य जनगणना निदेशक विश्वजीत पेगू ने उम्मीद जताई है कि डिजिटल पद्धति अपनाने के कारण जातिगत गणना पूरी होने के तीन महीने के भीतर ही अंतिम रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी।कोविड-19 की परिस्थितियों के कारण वर्ष 2021 में देश में जनगणना नहीं हो सकी थी, जिसके चलते पांच साल की देरी से हो रही यह गणना काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जनगणना की प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने के लिए अधिकारियों को नीले या काले बॉल पेन का उपयोग करने का निर्देश दिया गया है। सरकार ने नागरिकों से इस प्रक्रिया में पूर्ण सहयोग करने की अपील की है ताकि सटीक और व्यापक आंकड़े प्राप्त किए जा सकें। मालूम हो कि यह संपूर्ण प्रक्रिया 1948 के जनगणना अधिनियम और 1990 के जनगणना नियमों के तहत संचालित की जा रही है, जो 2011 के बाद देश की सबसे बड़ी जनसंख्या गणना प्रक्रिया है।
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